भाग-5
हेलो मनोहर! हम पुकारे
हँ,भैया गोड़ लगैत छी
खूब नीके रहू मनोहर। सब कुशल-मंगल! अहाँ तँ कहियो अबितो नहि छी।भेटघाट होइत रहबाक चाही ने।हँ,सुनू मनोहर हम पारिवारिक डेरा ल' लेलहुँ अछि।अहाँक भौजी आओर दीपक सेहो गामसँ आबि गेल छथि।अहाँ काल्हि डेरापर आउ।दिनक भोजन संगे करब।देबू कें सेहो फोन करैत छियनि।
हँ,भैया एबे करब।डेरा कोनठाम लेलियै अछि?
मनोहर!डेरा संगम विहार कालोनीमे अछि।शिव मंंदिरसँ सटले दक्षिण भी.झाक मकानमे।अपने मिथिलाक छथि।नाम छियनि विश्वनाथ झा।कालोनीमे भी.झाक नामसँ ख्यात छथि।
बेस पुकारे भैया।एबे करब।एखन फोन रखैत छी।किछु जरूरी काज क' रहल छी।
सुनै छी कुमकुम!
'हँ,यौ सुनै छी कान दुरूस्त अछि।'
'नीक बात।तँ सुनू।काल्हि मनोहर आ देबू कें अपना डेरापर बजा रहल छियनि।दिनक भोजन हमसब संगे करब।
कुमकुम पुकारे झा दिश उन्मुख होइत कहलनि,"एँ यौ! एखन तँ पूरा वर्तनोवासन नहि अछि।कोना खाना बनत?
छौ-नौ थोड़े बनेबाक छै।जाइ छी एन आइ ए मार्केट ओत्तहिसँ एक-डेढ़ किलो माछ नेने अबैत छी।माछ-भात लिअ बस!
ठीक छै जे आज्ञ,कुमकुम बजली।
देबु पुकारे सँ जिज्ञाशा करैत पुछलनि!भैया मनोहर एखन धरि नहि पहुँचल छथि।
'अबिते हेताह।
कनियेकालक पछाति, एकटा चमचमाइत कार पुकारे झाक डेराक सोँझा ठमकलै ओहि कारसँ मनोहर उतरलाह।
मनोहरकें पहुंचिते मातर देबु प्रश्न केलनि ककर कार छलयै यौ?
हमर मैडम के कार छलयै।की कहु देबु भाइ, हमरा रवियोक' छुट्टी कहाँ रहयै।मैडम कालेजक चेयरमैनक बेटी छै।ओएह मैनेजिंग डाइरेक्टर छै।किछु दिन सँ ओ हमरा अपना संगे राख' लागल अछि ।जतय-जतय जैत ओकरा संग रहियौ।कोनो टाइम टेबल नहि छैक।रातिक आठ-नौ बजे धरि ओकरा संगे रहय पड़ैत छैक।
'आबि गेलहुँ मनोहर।'
हं,भैया,आबि गेलहुँ।
'भौजी कतय छथि?'
ओहिकात भानस क' रहल छथि।
मनोहर जाक'कुमकुमक पैर छुबैत छथि।
'गोड़ लगैत छी भौजी।'
खूब नीके रहू मनोहर।आब जल्दी सँ विवाह क' लिअ।ई दिल्ली छै बौआ।चमक -दमकमे ओझरेलहुँ तँ गेले बुझू।एखन तँ देखिते छियै।कतेको जे गाम सँ दिल्ली अबयै से एतय सँ एकटा के नेने गाम पहुँच जाइये।कैकटा विआहलो के ई किरदानी छै।अहाँ तँ एखन काँच कुमार छी। आर सब ठीक ने यौ मनोहर बौआ।
हं,भौजी,सब ठीक अछि।नोकरी भेट गेलय। रहै के जगह सेहो मालिक द' देलकए।
'गाम-घरक हाल-चाल कहु भौजी।'
गाम घरक हाल-चाल ठीके अछि।कोनो परिवर्तन नै।अहुँक माय-बाबू ठीके छथि।गाममे रहयवला लोक आब रहयै थोड़े।आब लोक समय खेपि रहल अछि।
चलू मनोहर ! भोजन क' ली।जखन बनि गेलै तंँ भोजनकें सेरायब उचित नहि।
हं,भैया।चलल जाय।
तीनू गोटा पतियानीमे बैसि क' जेना गामक गौंआरी भोज होय,भोजन क' रहल छथि।सब भोजन करैमे एकाग्र छथि।मौनकें तोड़ैत पुकारे बजला--,'की यौ देबु!केहन तीमन बनेलनि अछि भौजी'
भैया!एक नंबर!बहुत नीक।
मनोहर बजला- 'भैया एक बर्ष भ' गेल गामसँ एला।पहिल दिन माछ खेलहुँ अछि।पूरा तृप्त भ' गेलहुँ।की जबरदस्त माछ बनेलनि अछि भौजी!
'धन्यवाद भौजी।'
पुकारे देबुसँ पुछै छथि।की यौ देबु! अहाँक काज केहन चलि रहल अछि?
'भैया! काज ठीक चलि रहल अछि।सरदारजी नीक लोक छै मुदा दरमाहा बड़ कम दैत अछि।
पुकारे झा सांत्वना दैत कहलनि,'बढेबे करत।प्राइवेट नोकरी छै,नहि बढ़ायत तँ दोसर देखल जेतै।
पुकारे मनोहरसँ जिज्ञाशा प्रकट केलनि,'मनोहर अहाँ तँ शिक्षा लाइनमे छी।दीपककें कतहुँ नाम लिखाब'पड़त।से सोचियौ।गामक स्कूलमे तँ तीसरा क्लासमे पढ़ैत छलय। शिक्षा जगतक बात तँ अहीं फरीछ सँ बुझबै।की कोना हेतै से अहाँ देखियौ।
'हँ,भैया सोचैत छियै।आब तँ नबके सत्रमे नाम लिखेतै।एखन तीन मास देरी छै।
पुकारे बजलाह-से बात तँ ठीक छै मुदा दिल्लीक स्कूलमे बड़ ने तामझाम छै यौ मनोहर।
'हँ,से बात तँ छै भैया। '
'एकटा काज करू।गामक स्कूल सँ दीपकक टी.सी मँगबा लेब। टी.सी पर डी.ई.ओ सँ काउन्टर साइन करायब नहि बिसरब।'
मनोहर कुमकुम दिश उन्मुख होइत कहैत छथि,' जबरदस्त माछ बनेलहुँ अछि भौजी।मायक हाथक माछ मोन पड़ि गेल।'
ओह!अपना गामक बड़की पोखरिक माछक स्वाद संसारमे कतहुँ भेटत।कथमपि नहि।अद्भुत्।मुदा दिल्लीयोमे एहन स्वदगर माछ। भैया कतयसँ ताकि अनने छलाह?बहुत स्वादिस्ट छल।हमरा एतुका बर्फवला माछ देखि क'माछ खयबाक इच्छे नहि होइये।एकबेर एकटा होटलमे माछ खयबाक लेल गेल रही एक कौर मुहमे उठा क' देलियै से भभक लागल जे दोबारा कहियो माछ दिसन तकबाक हिम्मत नहि भेल।
भाग-6
हेलो मनोहर! हम देबु
हँ,देबु भाइ,की हाल -चाल
'सब ठीके कहक चाही मनोहर भाइ।कहलहुंहें जे कोनो दोसर काज देखियौ।एहि दरमाहा सँ काज नहि चलतै।सरदारजी तँ दरमाहा बढ़बिते नहि छैक।एहि सँ बेसी तँ हम गाममे ट्युशन कोचिंग सँ कमा लैत रही।
देखै छियै देबु भाइ,कोनो जोगार हेतै तँ तुरंत खबरि करब।
मनोहर भाइ!अपन समाचार कहु।
ठीक अछि देबु भाइ।हमरा अलगे कष्ट अछि।
देबु पुछलनि-"केहन कष्ट मनोहर भाइ?"
'की कहु देबु भाइ! मैडम अपने बंगलाक बगलमे एकटा डेरा दिया देलक।हमरा आफिसक काज सँ हटा क' अपन नीजी सचिव बना लेलक अछि।आब भरि दिन जतय-जतय ओ जाइत छैक,संगे रहु।भोर नौ बजे सँ रातिक दस बजे तक रहय पड़यै।एको मिनटक फुरसति नहि।रवियोक' कोनो ने कोनो कार्यक्रम, पार्टी-सार्टी रहिते छैक।
ऐँ यौ। मनोहर भाइ !मैडम के धिया-पुता,परिवार नहि छैक की?
नै यौ देबु भाइ! मालिकक एकमात्र बेटी छै।विवाह भेल छै।घरवला कोनो विदेशी कंपनीमे नोकरी करैत छैक।सुनै छियै दुनू परानीमे पटरी नै बसै छै।आफिसमे कनफुसकी होइत रहैत छैक जे दुनूक आपसी मेलजोल ठीक नहि चलै छै।तलाक होब'वला छैक।
देबु बजला,' ओ तखन सम्हरि क' रहब मनोहर भाइ।अहाँ देखबा-सुनबा मे बड़ स्मार्ट छी तें कहलहुँ।ताहुमे हरियाणवी मौगी अछि।हरियाणाक गाय-महिंस सब बड़ कठमस्त, तेहने दुधगरि।जमनापारी नस्ल ओतहि के छैक ने।तहिना हरियणाक स्त्रीगण सबहक हाड़-काठ सेहो बड़ मजगुत।तेहन मेहनती।'
से तँ छैक देबु भाइ।मैडम थकै नहि छैक।हम तँ अकछा जाइत छी।भोर सँ दस बजे राति धरि खटिते रहैत छैक।कखनो चैन नहि।कहियोकाल कहत लगता है तुम थक गये हो ।तुम डेरा चले जाओ।
'देखियौ मनोहर भाइ! आर किछु नै कहब माय बापक एकलतुआ पुत छी से बचि क' रहब।'
'चिंता नहि करू देबु भाइ।हम बचले रहब'।
'चिंताक बात छैक मनोहर भाइ!मुदा आगाँ जे हेतै से नीके हेतै। मनोहर भाइ फोन रखैत छी।पलखति भेटलापर फेर बात करब।
नै,नै ठहरू देबु भाइ,किछु आर बात करबाक अछि।
आफिसके फोन सँ करैत छी।सरदार ओहु लेल बिगरैत छै।
कहु ने मनोहर भाइ!
'देबु भाइ!गामसँ एना कतेक दिन भ' गेल से सोह अछि?'
'हँ,यौ पुरा बर्ष दिन भ' गेल।'
सएह कहलहुँ अछि हमसब कोनो गामो गमाइत जाइत रही तँ कारी बड़ेड़ी नहि होअ दियै।कतबो अबेर भ' जाय मुदा हमर सबहक राति धरि गामेमे बितैत छल।
हँ,से तँ छैक मनोहर भाइ।
भाइ!ताहि गामकें त्यागना बर्ष दिन भ' गेल।
देबु गामक स्मृतिमे हेरा गेलाह।एह! सोचैत रही जे किछु भ' जेतै गाम सँ नहि जैब।गाममे डेयरी फार्म खोलब।खूब दूध उत्पादन करब।अपनो टाका कमायब आओर किछु लोककें रोजगार सेहो भेटतै।मुदा अपना बिहारमे किछु संभव नहि छैक।सबसँ बेसी तँ लोक नहि जीबय देत।जे पढ़ि लिखि क' महिंस पोसै छी।परिवारक लोकक अलगे क्वाथ।देखौ ने एतय लोक देबु कोन धरानी अपन गुज्जर क' रहल छथि।ओहो एसकर,जखन परिवार हैत तखन कोन अधापन बितत!
की भेल देबु भाइ ?अचानक कियै चुप भ' गेलियै?
'नै किछु, गामक पुरनका दिनसब मोन पड़ि गेल।'
हमर विचार सँ चलू एकबेर गाम सँ भ'अबैत छी।
मनोहर भाइ! हम तँ सोचैत रही एकेबेर दियिबातीमे गाम जायब।मुदा अहाँ कहैत छी तँ चलू।सुनै छियै गाममे आम खूब फड़ल छै।टिकट के व्यवस्था करू मनोहर भाइ।भ' अबैत छी गामसँ।
भाग-7
'हेलो पुकारे भैया!'
'हँ,मनोहर की हाल चाल?
गोड़ लगै छी भैया।कहलौहें जे दीपक के एडमिशन के की भेलै?
यौ मनोहर!एखन धरि कहाँ किछु भेलयै।
से किछु सोचबै ने भैया।एकटा प्रिंसिपल हमर परिचित छथि।दिल्ली सरकारक स्कूल छैक।कहलनिहें जे एडमिशन भ' जेतै।रजिस्ट्रेशन शीघ्र करब' पड़त।अहाँक डेरासँ पांच किलोमीटर पर छैक स्कूल।स्कूलक बस ओतय धरि जाइत छैक।
'हम काल्हि फोन करैत छी मनोहर।'
जी भैया,फोन रखै छी।
कुमकुम पुकारे झाक हाथमे चाहक कप दैत पुछै छथि।आइ बहुत चिंतित मुद्रामे छी। कोनो विशेष बात की?
हँ,कुमकुम।चिंताक बात तँ अछि।दीपकक एडमिशनक बिषयमे निर्णय लबय पड़त।
कुमकुम पुकारे झाक बातमे हँ,मे हँ मिलबैत कहलनि,से तँ लेबहि पड़त।
'कुमकुम!हम कैकटा प्राइवेट स्कूलमे आइ गेल छलहुँ।ओकर सबहक जे तामझाम छैक ताहिमे सकनाय बड़ मोसकिल छैक।बहुत डोनेसन मंगै छै।नीक स्कूलमे पचास हजार सँ डेढ़ लाख धरिक माँग छै।ताहिपर महीनवारी फिस तीन सँ पाँच हजार।तखन किताब ओकरे सँ लियौ।युनिफार्म, जुत्ता-मौजा सब ओकरे सँ लियौ।
'ऐ यौ प्राइमरी स्कूलमे पढ़बाक लेल एतेक डोनेसन!एतेक फिस! प्राइवेट स्कूलक लेल कोनो नियम कानून नहि छैक की?
कोनो नियम नहि छैक कुमकुम।जतेक पैघ-पैघ स्कूल छैक से कोनो ने कोनो नेताक छैक।जे नेताक नहि छैक से कोनो ने कोनो बड़का नेताकें पकड़ने छैक।चुनावमे ओकरा सबकें फंडिंग करैत छैक।ओ सब जे कहतै से करहि पडतै।
कुमकुम!हमर तँ विचार अछि दीपकक एडमिशन कोनो सरकारी विद्यालयमे करबा दियै।घरपर नीक ट्युटर लगबा दियै।एतुका सरकारी स्कूलक हालत अपना बिहार सँ नीक छैक।शिक्षकक बहाली प्रतियोगिता परीक्षाक आधारपर होइत छैक।नीक शिक्षक सब छैक।
कुमकुम कने निराश होइत बजली,किछु छैक मुदा छैक तँ सरकारिये।कतहु लिखबा दियौ।पढ़ैवला हेता तँ पढ़ि लेताह।बिना अर्थक मनोरथ बेकार छैक।
पुकारे झा कुमकुमकें सांत्वना दैत कहैत छथि,'शिक्षा शिक्षक दैत छथि। उँच-उँच मकान आ आरामदेह व्यवस्था रहने बहुत नीक पढ़ाइ होइत छैक से बात नहि।अहाँ मोन छोट जुनि करी।सब नीके रहतै।
कुमकुम पुकारे झाकें कहैत छथि।जतय होइ छै नाम लिखबा दियौ।बैसु नहि,लागि जाउ।फरवरी बीत रहल अछि।अप्रैल सँ नब सत्र आरंभ भ' जाइत छैक।
हँ,हम आइये सँ प्रयासमे लागि जाइत छी।गाममे हम ऋषिकें फोन केने छलियनि जे गामक स्कूलसँ टी.सी.ल'क' डी. ई.ओ सँ काउंटरसाइन कराक'शीघ्र पठा दिअ।ऋषि कहलिहें जे भैया एहिमे किछु खर्चा लागत।डी.ई.ओ आफिसमे बिनु खर्चा के काज नहि हैत।कहि देलियनिहें जे खर्च लागत मायसँ ल' लेब मुदा शीघ्र काज दियौ।ओ आस्वस्त केलनि अछि जे भ' जायत भैया।
कुमकुम बीचमे टोन दैत बजली,'ऋषिकें कहलियनि आ नहि हैत।ऋषि सँ कोन काज नहि हेतनि।थाना होइ,ब्लौक होइ,अंचल होइ,जिलाक कोनो कार्यालय सब ऋषिक पैर त'र छनि।ओ तँ कहिते छथि 'आतुर काज दरब सँ होइ।'
'हेलो मनोहर!'
हँ,पुकारे भैया
कहलौंहें जे अहाँक भौजीक मोन सेहो मानि गेलनि। अहाँ दीपक के रजिस्टेशन सर्वोदय विद्यालयमे करबा दियौ।
मनोहर उतारा दैत कहलनि,भैया अहाँकें आब'पड़त।आवेदन-पत्र पर हस्ताक्षर अहीँक हैत ने।
जहिया कहीं हम उपस्थित भ' जायब।
पुकारे भैया एहन करू अहाँ दीपक आओर भौजीकें सेहो संगे नेने अबियनु।भगवती चाहथिन तँ ओही दिन एडमिशन करबाइये देबै।
'मनोहर! मुदा टी.सी.गाम सँ एखन धरि कहाँ पहुंचलै अछि।
छोड़ू ने भैया। टी.सी.जखन एतै अहाँ जमा क' देबै।प्रिंसिपल के सेहो हम कालेजमे बहुत काज करबा दैत छियै।हमरा लेल एतबो नहि करता।हम एखने प्रिंसिपल सँ बात क'क'फोन करैत छी।
हँ,भैया बात भ' गेल।समस्या एकेटा अछि जे हमरा छुट्टीक बहुत अभाव अछि।प्रिंसिपल साहेब चारि मार्च क' एबाक लेल कहलनि अछि।एहन करू अहाँ तीनू गोटा चारि तारीख अर्थात् परसु आबि जाउ।दिल्लीक जे परिचय पत्र ,रासन कार्ड आदि बनबौने होयब सबटा नेने आयब।
मुदा मनोहर अहाँक बिनु रहने कोना हैत?
भैया! एहन करू अहाँ सब ठीक एक बजे स्कूलक गेट लग पहुँच जायब।हम आबि जायब।
चारि मार्च क' पुकारे झा आ कुमकुम अपन एकमात्र पुत्र दीपक के ल'क' ठीक एक बजे सर्वोदय विद्यालयक गेट लग पहुंच गेलथि।किछुए क्षण ठहरलथि ताबे मनोहर सेहो ओतय पहुँच गेलथि।
प्राचार्यक केबिनमे सबगोटा दाखिल होइत छथि।प्राचार्यकें सबटा बात कहलखिन।सबटा बात मनोहर पहिनहि क' नेने रहथि।प्राचार्य औपचारिकताक लेल एकटा आवेदन भरबेलखिन।
एकटा शिक्षिकाकें आदेशित करैत कहलखिन जे,'अहाँ एहि बच्चाकें एकटा टेस्ट ल' लियौ जे ई चारिम वर्गमे पढ़बाक योग्य अछि कि नहि।आधा घंटाक भीतर हमरा रिपोर्ट करू।
शिक्षिका दीपककें ल'क' एकटा दोसर कोठरीमे चलि गेलीह।दीपकें गणित और भाषाक साधारण प्रश्न सब पुछलखिन।
किछुए काल बाद शिक्षिका प्राचार्यक आगाँ एकटा कागज बढ़बैत कहलनि जे सर,बच्चा हिन्दी और गणित मे ठीक है।इंगलिश थोड़ा वीक है।लेकिन ये पकड़ लेगा।
प्राचार्य कागजकें देखैत मनोहर सँ कहलनि जे आवेदन पत्र जमा क' दियौ।गामसँ जखने टी.सी आबय पठा देब।नब सत्र दू अप्रैल सँ आरंभ हेतै।
'सर,ई छथि पुकारे झा,हमर गामक भाइ। हिनके पुत्र छियनि दीपक। बहुत नीक लोक छथि।हमर स्थानीय अभिभावक।आब इएह अपनेसँ भेट करताह।'
'कोनो बात ने।अहाँ मार्चक अंतिम सप्ताह या अप्रैलक पहिल सप्ताह मे भेट करू।किताबक लिस्ट आओर युनिफार्म आदिक बिषयमे सबटा समझा देब।
' धन्यवाद प्राचार्य महोदय।'
ठीक छै पुकारे जी आब अहाँसब जाउ।हमरा जकटा जरूरी मिटिंग करबाक अछि।
भाग-8
हेलो देबु भाइ!
हँ,मनोहर भाइ!की हाल-चाल यौ
हाल-चाल बड़ नीमन।टिकट भ' गेल।9 जून क'गाम चलबाक अछि।दिल्ली सँ पटना सम्पूर्णक्रान्ति एक्सप्रेसमे।सुपरफास्ट गाड़ी छै।सब कहैत छै राजधानी जकाँ चलैत छै।
से बात तँ ठीक मनोहर भाइ मुदा पटना सँ मधुबनी जाइमे की हालत हैत से सोचि क' देह सिहरि उठयै।बस सँ आठ घंटा लागत।रामहिलोरा झुलैत जैब।
हँ,देबु भाइ।हमरा बड़ ड'र होइत रहयै। जखन बस खाधिमे एकदमसँ झुकि जाइ छै।भरि रस्ता हनुमान चालिसा पाठ करैत रहैत छी।
से बात तँ ठीके मनोहर भाइ।'खाधिमे सड़क छै कि सड़कमे खाधि से कहब कठिन।की करबै!उपाय कोन।जन्मभूमि अछि।माता-पित छथि जेबाक तँ अछिये।बिहारक मुख्यमंत्री कखलिनहें बिहारक सड़ककें हेमामालिनीक गालसन चिक्कन क' देथिन।आब दिन दूर नहि छै ।'
'एबाक बेरक यात्रा मोन अछि ने देबु भाइ!'
हँ,यौ मोन अछि तें कहलहुँ जेना हुए रिजर्वेशन कराउ।रिजर्वेसन कंपार्टमेंटमे सेहो वेटिंगवलाक बड़ भीड़ रहैत छै।सबेरे सीट खसा क' सुति रहब नै तँ सब बैस जायत तँ उठबे नहि करत। के झगड़ा करय?
हं,एकटा बातक आर सावधानी राखय पड़त।स्टेशन सबेरसकाल चलि जायब।बिहार जायवला ट्रेनमे अपार भीड़ भ' जाइत छैक प्लेटफार्मपर।कयैक दिन पुलिसकें लाठी भाँजय पड़ैत छैक।
'से बिहार जायवला ट्रेनमे एना कियै होइत छैक देबु भाइ। दिल्ली सँ तँ देशक सभ भागमे रेलगाड़ी जाइत छैक।आनठाम जाइवला रेलमे एना कहाँ होइत छै यौ।'
मनोहर भाइ!आधा दिल्ली बिहारीये सँ भरि गेल छै।की करौ लोक? ओतय कोनो काज रोजगाड़ छैहे नहि।जेहो किछु लोक खेतीबारी सँ जुड़ल अछि, रौदी-दाहीक मारल अछि। सबकें परैनी लागल छै।एकगोटक कंफर्म टिकट पर चारिटा वेटिंगवला तथा ओकरा सबकें चढ़बैवला बारह गोटा। बुझलियै ने आब।स्टेशन पर कियै एतेक भीड़ होइत छैक?
एकटा बात नहि बुझलियैक देबु भाई!
की ?
एतेक लोक अपन ड्युटी छोड़ि क' स्टेशनपर अरियातय लय कियैक जाइत छैक?
यौ सब अरियातय थोड़े जाइत छै मनोहर भाइ
तखन!
'ओ लोकनि अपना घर-परिवारक लेल मोटरी पहुंचाबय जाइत छैक।'
' ओ से बात!'ओहि मोटरीमे की सब रहैत हैतै?
' ओहि मोटरीमे रहैत छैक साबुन,तेल,बिस्कुट,दालमोट,भुजिया,हार्लिक्स, नव कनिया सबहक लेल श्रृंगार प्रसाधनक सामग्री आदि।
ठीक छै देबु भाइ!मोटा चोटा तेयार क'लेब।बेसी समान नहि लेब।सबटा समान अपना बेनीपट्टी-पुपरी बजारमे भेटिते छैक।
भाग-9
' थोड़ा घुसककर बैठिये न।'
' यौ! हम तँ अपन सीट पर बैठल छी।सीटपर तीनक बदला चारि गोटे पहिने सँ बैसल छी।
'हमरा भी टिकट है इसलिए न बोले हैं।
'तँ की बुझा रहल अछि हम बिना टिकट के छी।
'ई देखियौ हमर टिकट,दू आदमीक टिकट।एक नं पर हमर नाम देबु कामति ,दू नं पर हमर संगी मनोहर झा।'
की कोनो शंका! हम दुनू गोटा पटना धरि जायब।'
'नहीं सो नहीं बोले हैं।हमको भी आरा तक जाना है।टिकट कंफर्म नहीं हुआ।'
'अच्छा से कहु न।गुंजाइस होइये तँ सुतय'बेर तक बैसु।जखन सुतैक बेर हैत बिचला सीटवला सीट खोलबे करत।उपर-नीचा हमसब छी।
ताबे सामनेवला सीटपर झगड़ा बजरि गेलै।एकटा यात्री अपना सीटक लग एला।सीटक नीचाँ समान पहिनेसँ ठसाठस भरल छल।
'सीट के नीचे किनका सामान है?'
कियो बजबे ने करय।हारि क'सीटवला व्यक्ति सीटक नीचाँ सँ समान निकालय लगल।तखने उपरका बर्थपर बैसल एक आदमी कुदल।
'सामान क्यों फेक रहे हैं?'
ये मेरा सीट है।मैं अपना सामान कहाँ रखूँगा?
पूरा रेल ही आपका है।
नहीं ये दो सीट है मेरा।
सर,टिकट एकेटा कंफर्म भेलै?की करितियै।ससुर मरि गेल छथिन दुनू गोटाकें जायब जरूरी अछि।
ठीक छै चलू।हमर मात्र इएह दूटा समान अछि राखय दिअ।
कहुना क' ओ यात्री अपन सामान रखलनि।हुनका सीटपर पहिने सँ तीन गोटा बैसल छै।कहुना क' बैसला।
भाग -10
मनोहर भाइ छी!
हँ,देबु भाइ।आउ!आउ
बहरायब नै
हँ,यौ आउ ने चलै छी।
'गोड़ लगैत छी काकी।'
खूब नीके रहु देबु।नीकेना छलहुँ ने यौ।
हँ,काकी ठीक छलहुँ।अहाँस ठीक छी ने।
हँ,हमहुँ सब ठीक छी।बैसु चाह पिब लिअ।
आउ देबु भाइ। एतहि आउ।
ओसारा पर राखल कुर्सी पर दुनू गोटा बैसि गेलाह।
मनोहर मायक हाथसँ ट्रे ल' लेलनि।
चाहक कप देबु कें पकड़बैत मनोहर कहैत छथि।
'देबु भाइ चलु ने कनि गाम दिश सँ घुरि अबैत छी।
हँ,चलू।हमहुँ इएह सोचि क' विदाह भेल छी।
हमर तँ विचार रहय काल्हि भोरमे जाइ जे निकलब तँ कनि गाछियो दिश सँ भ' आयब
मुदा जखन अहाँक विचार अछि तँ चलू भ' अबैत छी।एखन चलू लक्ष्मीनारायण मंदिर दर्शन क' अबैत छी।मुदा एकटा बातक ध्यान राखब।चौक परहक गोलैसीमे नहि धरायब।दर्शन करब आओर छहर दिश निकलि जायब।
'गाममे किछु नहि बदलल अछि मनोहर भाइ।सब ओहिना अछि।एक बर्षमे बदलबे की करत।'
'देबु भाइ पचीस बर्षमे की बदलि गेल से तँ कहु ?'
पचीस बर्षमे तँ बदलल अछि ।
कथी?
बिहारक सत्ता।पहिने निष्कंटक कांग्रेस राज करैत रहय।आब नया पार्टी जनता दल राज क' रहल अछि।
हँ,से बात तँ ठीक कहलहुँ मुदा सत्ता बदलला सँ की बदललै?
सब ओहीना के ओहिना।
सरकार बदलै छै।व्यवस्था तँ ओहने छै।
सत्तापर बहिरा करैत सब बैसल अछि।कुंडली मारि क।' लोकक खून चुसि रहल अछि।
छोड़ू ई सब बात।चलू भगवानक दर्शन करी। अपना गामक ई भव्य मंदिर।मंदिरक सोझाँमे पोखरि।पोखरि सँ सटले अपना सबहक स्कूल।जनै छी देबु भाइ जखन दिल्लीक ट्रैफिकमे फँसल लोकसभकेँ बिषाह कार्बन डायआक्साइड पीबैत,हँफिआइतअपसियाँत महानगर दिल्ली बीमार कुकुर जकाँ हकमैत रहैत अछि।तखन मोन पड़ैत अछि अपना गामक ई मंदिर आओर कमलाकातमे बनल ई उँचगगर छहरि।
'की यौ मनोहर कहिया एलहुँ?'
'आइ भोरमे एलहुँ काका।'
'सब कुशल-मंगल ने काका।
हँ यौ ।अहाँ सब ठीक तँ हमहुँ सब ठीक।कतय चललहुँ अछि?
मंदिर जा रहल छी काका,दर्शन करबाक लेल।
जाउ।जरूर जाउ।
अच्छा!एकटा बात कहु।दिल्लीमे कोन काज करैत छी।
काका!हम एकटा प्राइवेक कालेजमे एकाउंटेंटक काज करैत छी।
वाह!बड़-बढ़ियाँ
तो हौ देबु!
काका हमहुँ एकटा प्राइवेट कंपनीमे एकाउंटेंटक काज करैत छी।
बड़ बेस।
काका अर्थात् जीवन झाकें गोड़ लगैत दुनू गोटा आगाँ बढ़ि गेलाह।
जीवन झा चाहक एक सुरूक्का मारैत विदेशी भगत कें कहैत छथि।
ऐँ हौ विदेशी ! जे दिल्ली जाइत अछि सब आफिसरे भ' जाइत अछि।
हँ,से तँ ठीके कहलियै जीबन काका।दिल्ली सँ जे आएत तँ जीट-जाट, ने देखू।की कहु ?हमरा टोलक तँ अलबत्त लीला छैक।
'से की हौ विदेशी?'
हमरा टोलमे तँ जे छौंड़ा दिल्ली सँ अबैत अछि से सभ सँ पहिने तँ अपन भाषामे बाते नहि करत।काल्हि हमरो टोलमे दू-चारिगो छौंड़ा सब दिल्ली सँ आयलए ।एकटा हमर ज'न अछि रविया।ओकर बेटा सेहो गेल छलै दिल्ली। परसुए एलयै।काल्हि गेल रही धरानटोल। भोरे-भोल ओ छौंड़ा भेटल।कहलक गोड़ लगते हैं बाबा।हम पुछलियै 'ऐं रौ! ई कोन भाषा भेलै?अपन भाषामे बाज ने।'
'उतारा दैत ओ छौंड़ा कहलक- दू साल न हो गया बाबा।भाषा थोड़ा-थोड़ा भूल न गये हैं।'
ऐं रौ बीस बर्षक तों भ'गेल छलहें तखन तों दिल्ली गेलें आ दुइये बरखमे तों भाषा बिसरि गेलहीं।
हौ,वीदेशी!गोड़ लगलकह तँ आशीर्वाद देलहक की नहि।
ऐह!केहन बात करैत छी जीबन काका।आशीर्वाद ककरा लेल रखबै।दिल्ली जाय लेल मासुल सेहो हमहीं देने छलियै।बात कहलहुँ जे हमरा एतुका लोक दोसराक छिछा उतारबा मे कतेक ओस्ताद अछि।
मनोहर भाइ!चलू छहर कात सँ घुमि आबी।
हँ,देबु चलू हमहुँ इएह कहैक लेल रही।
'देखियौ मनोहर भाइ सुरूज तेज गतिये अपना घर दिश प्रस्थान क' रहलाह अछि।'
'देबु भाइ!सुरूज नहि प्रस्थान क' रहलाह अछि वास्तवमे सुरूज तँ छथि ठामक ठामहि।एकरा गोधुलिबेला कहैत छैक।हे ओमहर देखियौ कमलाकात सँ चराउर क'क' गाय महिंसक हेंड़ सब अपन बथान दिश घुरि रहलए।पाछाँ -पाँछा चरबाहा सब सेहो आबि रहलए। कमलाक धारमे सुरूजक रक्तिम किरण पसरि गेल अछि।बीच कमलामे एकटा नाह सेहो देखा रहल अछि।किछु लोक ओहिपर सबार अछि।
केहन अनुपम दृश्य अछि,अद्भुत् छटा।'
'मनोहर भाइ!पछिला साल भरि सँ दिल्लीमे छी कहियो एहन दृश्य अभरल।'
'एकदम नै देबु भाइ।मोन सब दिन हलचले रहल।दिल्लीमे भोर सँ साँझ धरि सब भगिते रहैत अछि।हमहुँ सब समयक पाँछा पड़ाइत रहैत छी। मुदा समय ककरो आइ धरि पकर' देलकै।समय अपना गति सँ चलैत अछि।लोककें लगैत छैक जे हम समयक संग चलि रहल छी वा समयसँ आगाँ चलि रहल छी।'
'मनोहर भाइ!नदी तँ दिल्लियो मे छैक।यमुना सन महत्वपूर्ण नदी।मुदा कहियो ल'गसँ यमुनाकें निहारबाक अवसर कहाँ भेटल।कहियो एहन विचारो उत्पन्न नहि भेल जे यमुनाक कात टहलैक लेल जाइ।जहिया-जहिया यमुनाक कछेर सँ गुजरैत रही,यमुनामे प्रवाहित गंदगी तथा कछेरपर पसरल दुर्गंधयुक्त कचरासँ मोन कोनादन करय लगैत रहय।'
'देबु भाइ!ओ बिचला बाधमे एकटा मकान देखा रहल अछि।ओ घर तँ साल भरि पहिने नहि रहैक।हाले फिलहालमे बनल बुझा रहल अछि।'
'हमरो नै बुझल अछि मनोहर भाइ ।'
'गोड़ लगै छिय देबु भैया।'
'खूब नीके रह' धीरज।'
'कहिया एलियै भैया?'
हम आइये भोरमे एलिय ।आर सब ठीक छ ने हौ।पढ़ाइ-लिखाइ चलै छ ने हौ।
'हँ,पढ़ाइ तँ चलिते हय भैया।मुदा की चलतै!बी.ए मे नाम लिखेला पाँच बरिस भ' गेल।तेसर सालक परीक्षा एखनतियो बांकिये हय।'विचार हय जे बी.ए क्लियर क' ली तखनि हमहुँ कतहु बाहर चलि जाइ।बाबू रोज बात कहैत रहैत छथि।जे जीवन भरि पढ़बे करब'तँकमेब'कहिया।तोहर बतारी सब कमा क' ढेरी कयने अछि।'
नै,नै एना सोचबो नहि करह।बी.ए पास अवश्य क' लैह।शिक्षा कहियौ बाम नहि जाइत छैक।काज-राज तँ जीवन भरि चलबे करतै।पढ़ाइ बादमे नहि हेतह।की करबहक एतुका सरकारक तँ लीले अपार छै।'पढ़ाइ के तँ जे करयै।समय पर परीक्षा करबा देतै तँ लोक रोजी रोजगाऱमे लागि जैत।'
भैया हमर बैचमेट सब जे दिल्ली विश्वविद्यालयमे पढैलेल चलि गेल से सब एखन पी.जी क' रहल अछि।हमसब बी.ए मे लटकल छी।
'की करबह।ई सब जन्मक अभिशाप अछि।जेहन प्रान्तमे जन्म लेने छी भोगहि पड़त।
'ऐँ हौ!धीरज ई बिचला बाधमे की बनलयै?' ओतय तँ बड़का परती छै ने हौ।लोक सब माल-मवेशी चरब' जाइत अछि ने ओतय।
हँ,भैया सही कहलहुँ।ओतय चरबाहा विद्यालय बनलयै।ओहिमे चरबाह सब पढ़तै।चरबाह सब गाय महिंस चरेबो करतै आओर पढ़ाइयो करतै।'
'वाह!ई तँ नीक बात।मुदा जे स्थापित स्कूल सब अछि ओकर हालत तँ खस्ता छै।ने स्कूलमे मास्टर, ने भवन।अपने गामक स्कूलमे हम सब पढ़ैत रही तँ बारहटा मास्टर रहथि।आब चारिटा छथि।भवनक हालति सेहो जर्जर अछि आ सरकार एहि च'रमे स्कूल बना रहल अछि।गज़बे लीला छै।'
देबु भाइ'!
हँ,मनोहर भाइ।
'कहलौहें जे ई चरबाहा विद्यालयक बिषयमे हम दिल्लीक अखबारमे पढ़ने रही।योजना बेजाय नहि छैक जे चरबाह सब गायो महिंस चरायत आ पढ़बो करत।
'गैया-बकरी चरैत जाय।मुनिया बेटी पढ़ैत जाय।'
देखैत रहियो मनोहर भाइ की होइत छैक।ई सरकार शिक्षाक प्रति संवेदनशील अछिये नहि देखिये रहल छी जे गामक एकटा होनहार नौजवानक स्वर्णिम दिन कोना स्नातकक एटका डिग्री लेब'मे बीत रहल छैक।डीग्री भेटतै तखने ने कोनो आगाँक दुआरि फुजतै।कालेज कैम्पससँ पढ़ाइक वातावरण बिल्कुल समाप्त भ' गेल छैक।परीक्षा प्रणाली पूरा ध्वस्त।सत्र तीन साल बिलंब सँ चलि रहल अछि।सत्र हेबाक चाही 89-92 ,परीक्षा चलि रहल अछि 86-89।जेना मोन हुए परीक्षा दियौ।तीन घंटाक बदलामे नौ घंटामे उत्तर-पुस्तिका जमा करू।अपने लिखय नै अबयै तँ दोसर सँ लिखबा लिअ।कोनो बन्हेज नै।कोनो परहेज नै।'



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