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जे.जे. कॉलोनी:
भाग-5 हेलो मनोहर! हम पुकारे हँ,भैया गोड़ लगैत छी खूब नीके रहू मनोहर। सब कुशल-मंगल! अहाँ तँ कहियो अबितो नहि छी।भेटघाट होइत रहबाक चाही ने।ह...
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सम्प्रति बहुत दिनक बाद कथाक कोनो पोथी पूरा पढ़ि जेबाक इच्छा भेल से डा.कीर्तिनाथ झाक कथा संग्रह'कथा कीर्तिनाथक' पूरा पढ़लहुँ।संग्रहमे...
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भाग ४ देबु मनोहरसँ पुछलनि- 'मनोहर भाइ! की भेल?' देबु!अहाँ कहु ने की भेल? 'अहुँ तँ छी पक्का मैथिल ने सोझ मुहें उतारा नहिये न...
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कावेरी कछेरसँ निलगिरी पहाड़ी धरिक यात्रा -------------------------------------------------------------...



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